रविवार, 17 जनवरी 2010

संभल के रहिए अभियान जारी है ।

सबसे पहले हमने दिनांक 24/09/2008 को आर टी आई के तहत अपने गाँव अरई (थाना-दाऊदनगर, जिला-औरंगाबाद) में नरेगा के तहत पूर्ण हो चुके तथा चल रहे कार्यों की परियोजना लागत एवं मजदूरों की जानकारी सहित पूरी सूचना तत्कालीन प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी श्री आशीष कृष्ण को प्रेषित आरटीआई आवेदन में माँगा था । उक्त पदाधिकारी द्वारा समय पर सूचना नहीं देने पर मैंने अपीलीय पदाधिकारी के यहाँ प्रथम अपील दायर की, जिसकी सुनवाई के बाद मुझे माँगी गयी सूचना उपलब्ध करायी गयी । सूचना देखकर दंग रह गया, बहुत बड़े स्तर पर घोटाला प्रकाश में आया । कुछ काम तो ऐसे दिखाए गए जो वास्तव में किए ही नहीं गए, जैसे योजना संख्या 08/2006-07 । इस कार्य हेतु 99500 रुपये व्यय हुआ दिखाया गया, जो अचंभित करनेवाला है । धरातल पर एक रुपये का कार्य नहीं हुआ और इतने रुपए की निकासी कर ली गयी । मैंने इस संबंध में संबंधित पदाधिकारी से शिकायत भी की पर कुछ असर नहीं दिखा । हाँ, उक्त कार्यक्रम पदाधिकारी प्रखंड प्रमुख से योजना स्वीकृति हेतु घूस लेते निगरानी विभाग द्वारा गिरफ्तार किए गए तथा अपने पद से भी बर्खास्त कर दिए गए ।
पुनः मैंने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत् अरई तथा मुसेपुर खैरा के बीच बननेवाले पुल को ठीकेदार द्वारा अन्यत्र बना देने पर ग्रामीण कार्य विभाग-2 के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता श्री श्रीकांत प्रसाद से उस पुल से संबंधित सूचना माँगी थी । उक्त महाशय द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर मैंने विभागीय सचिव से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत दर्ज करायी पर दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई । अलबत्ता जिम्मेवार कार्यपालक अभियंता श्री श्रीकान्त प्रसाद निगरानी विभाग द्वारा एक ठेकेदार से घूस लेते पकड़े गए तथा जेल की हवा खानी पड़ी ।
पुनः मैंने मध्य बिहार ग्रामीण बैंक, शाखा अरई में व्याप्त अराजकता एवं घूसखोरी से खिन्न होकर संबंधित लोक सूचना पदाधिकारी से केसीसी आवेदकों की लंबित सूची माँगी थी, जिसके उपरांत प्रबंधक द्वारा बहुत सारे आवेदकों से बिना घूस लिए उनका ऋण स्वीकृत किया गया तथा हम पर दाऊदनगर थाने में पैसा छिनने का झूठा मुकदमा (दाऊदनगर थाना काण्ड संख्या 217/2009) दर्ज करा दिया गया तथा प्रथम अपीलीय पदाधिकारी द्वारा मेरे आवेदन को अस्वीकृत कर दिया गया ।
इन सब से कुछ हो न हो एक बात तो अवश्य हुआ है कि ग्राम पंचायत अरई में कोई भी पदाधिकारी गलत कार्य करने से पहले सौ बार सोचने लगे हैं । और जो गलत करेंगे मैं उन्हें छोड़नेवाला भी नहीं हूँ चाहे वे कोई भी हों । अगर लोग सारी घटनाओं पर पैनी निगाह रखें तो महसूस करेंगे कि ग्राम पंचायत अरई के विकास राशि का दुरुपयोग करनेवाले पदाधिकारी एक-एक कर जेल यात्रा कर रहे हैं, बाकि लोग भी करेंगे और यह सब संयोगमात्र नहीं बल्कि प्रायोजित है ।
 
Some related links-
http://www.groundreportindia.com/2009/11/getting-fake-fir-instead-of-information.html
http://www.groundreportindia.com/2009/11/report-on-rti-seminar-patna-bihar.html
http://www.rajnisharai.blogspot.com/
 
Rajnish Kumar.

3 टिप्‍पणियां:

  1. apke dwara di gaye jankari behad utsah wardhak hai. halaki kuchh ek mamlo me adhikariyo se jankari nahi milne ke bat kahi gayi hai, kintu ab sabhi adhikariyo ko ye samjh lena chahiye ki agar RTI act me sarvochya nayaydhis bandhe hai to unki bisat hi kya hai. mai apko yad rakhne ke liye un paktiyo ko duhra deta hu jo sarvochya nayaydhis ke liye kahi gayi hai. "apki bises isthiti apki subidha ke liye nahi hai balki janta ka kam karne ke liye hai, aur wah janane ka use hak hai.
    punah apko badhai. abhiyan chalta rahe....

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  2. आपके कौशल की प्रशंसा किये बिना नहीं रह सकता!!
    अपनी समझ की ताज़गी और भावनाओं की निश्चलता को बनाए रखें.

    दुआ है, ज़ोर कलम और ज्यादा!

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