रविवार, 14 मार्च 2010

अथ श्री इन्दिरा आवास कथा



सबसे पहले तो बता दूँ कि इन्दिरा आवास के लिए निर्धारित मापदण्ड तय करते समय ही संबंधित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि ने भयंकर गलती (जान-बूझकर) की। बीपीएल सूचि बनाते समय गरीब और अमीर के निर्धारित मापदण्ड के अनुसार सर्वे न कर मनमाने ढंग से मुखिया के व्यक्तिगत संबंध के अनुसार सूचि में स्थान दिया गया। फिर मुखिया द्वारा इन्दिरा आवास के लाभार्थियों से पाँच-पाँच हजार रुपये की वसूली की गयी और वैसे लोगों को भी लाभान्वित किया गया जिनका या तो पक्का का मकान है या पहले से इन्दिरा आवास का लाभ उठा चुके हैं। विदित हो कि इस संबंध में स्पष्ट रुप से इन्दिरा आवास के नियमावली में लिखा गया है कि जो पहले से इन्दिरा आवास ले चुके हैं या जिनका पक्का का मकान हो, उन्हें इन्दिरा आवास आवंटित नहीं किया जाएगा। मैंने इस संबंध में स्थानीय प्रखंड विकास पदाधिकारी को स्पीड पोस्ट से पत्र भेजकर बाकायदे अयोग्य लाभार्थियों की पूरी सूचि सौंपी, जाँच भी हुई, प्रखंड विकास पदाधिकारी महोदय ने स्वीकार भी किया कि यह तो घोर अनियमितता है। उन्होने उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। पर लगभग एक सप्ताह के बाद पुनः बीडीओ साहब ने मोबाईल पर फोन कर सूचित किया कि "रजनीश जी, जाने दिजिए आपको इन सब चीजों से क्या लेना देना, ग्रामीण विकास मंत्री श्री भगवान सिंह कुशवाहा हमारे पास फोन कर काफी गुस्सा रहे थे और उन्होने कहा है कि जो सूचि है उन सब को चुपचाप इन्दिरा आवास का पैसा दे दो"। आखिर मेरी शिकायत का भी हश्र वही हुआ जो सबका होता है, पर मैं अब आगे क्या करुँ इस पर गंभीरता से सोच रहा हूँ, और कुछ ना कुछ नियमानुसार सार्थक कदम उठाऊँगा। हाँ, तो अभी कथा खत्म नहीं हुई है, कुछ लोगों को मैंने पैसा देने से रोका तथा उनका शपथ-पत्र वगैरह डाक से भिजवाया, क्योंकि जो घूस की रकम नहीं दे रहे थे उनका शपथ-पत्र वगैरह स्वीकार नहीं किया जा रहा था। अब उनसे पैसा वसूल करने के लिए इन्दिरा आवास का चेक प्रखंड में ही रोक कर रखा जा रहा है। इस संबंध में पूछने पर बीडीओ साहब ने बताया कि स्टाफ की कमी है, पर जिन्होने पैसा दे दिया था उसको तो स्टाफ की कमी नहीं खली। उसका चेक तुरत भेज दिया गया। चलिए, जिनके खाते में पैसा आ गया वे फिर शिकार बने बैंक प्रबंधक के। भ्रष्टाचारियों का गठजोड़ इतना तगड़ा रहता है, जिसकी पूछिए मत। प्रबंधक महोदय सभी लाभार्थियों से अपने लिए प्रति लाभार्थी पाँच सौ रुपए वसूले तथा जिन्होने मुखिया जी को पैसा नहीं दिया था उसे सत्यापित कराने के लिए मुखिया जी के पास भेज देते थे और फिर बिना पैसा लिए मुखिया जी सत्यापन कैसे करते। जहाँ तक मेरी समझ है, खाता खोलते समय ही खाताधारी का सत्यापन करा लिया जाता है और आवेदन पर परिचयकर्ता का भी दस्तखत होता है। फिर से सत्यापन कराने की बात गले नहीं उतरती। सबसे दुखद बात है कि अत्यंत गरीब तबके के लोग भी सूद पर कर्ज ले-लेकर घूस की रकम मुखिया तथा अन्य पदाधिकारी को देते हैं और ऐसे तो हमारे सामने सब सच बयान करते हैं, लेकिन जब शिकायत करने की बात आती है तो वे तैयार नहीं होते, यहाँ तक कि उनके बदले मैं शिकायत करता हूँ तो भी वे गवाही देने से डरते हैं। फिर भी मैं एकला चलो रे की तर्ज पे चलूँगा, शायद ये एकला कारवाँ में बदल जाए।

5 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिय रजनीश जी ,
    आपकी पुरी कहानी हमने पढ़ी , मेरी पत्नी भी जिला पार्षद है , मैं भी सारी बातो को जानता हूँ , यह अपने पुरे राज्य कि समस्या है , इसका निदान तत्काल में हमको लगता है पंचायती राज्य व्यबस्था तत्काल प्रभाव से बंद कर देना चाहिए , और मै आपको कर कि भी दिखा दूंगा , यह तो समाज में विष कि तरह फ़ैल चूका है .
    कारवाँ तो बरा खतरनाक बन रहा है हमलोगों का , रंग लायेगा आपका मिहनत ,
    जय हिंद ... जय बिहार ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. RAJNISH JI, JAB BHI MAI AAPKA LEKH PADTI HU TO APNE AAP ME ..AK JOSH AK TAKT PAIDA HOTI HAI ...OUR AAP AKELE KHA HAI HAMLOG SAB AAPKE SATH HAI ....BS CHALTE RAHIYE ...KADM SE KADM MILTE JAYEGA ,,OUR MANJIL PR BHI PAHUNCHENGE JAROOR.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. मैं एकबार फिर अमोद जी की बातों से असहमत हूँ। पंचायति राज व्यवस्था को खत्म कर देना उचित नहीं होगा।पंचायति राज व्यवस्था शक्तियों का विकेंदि्रकरन के सिद्धांत का अनुशरण करता है। हाँ, इसको ठीक ढंग से लागू करने की आवश्यकता जरूर है। सरकार द्वारा आवंटित की गई राशियों का ठीक ढंग से उपयोग होना चाहिए। इसके लिए लोगों में जागरूकता लाने की आवश्यकता है। रजनीश जी अपने लेखों के द्वारा साक्छरों को साक्छर करने की कोशीश कर रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. There are many discrepancies in Indira Awas Yojna. In many ongoing social welfare programmes commissions are being distributed among the B.D.O.,Panchayat Secretary and Mukhiya. Rajnish ji you are doing a great job in your village. I have remembered a saying that......
    मिटा दो अपनी हस्ति को अगर तुम मतॅबाँ चाहो
    कि दाना खाक में मिलकर गुले गुलजार होता है।
    ......So you are not alone many persons are following you.

    उत्तर देंहटाएं